कड़ियों का वर्गीकरण -Classification of Links in Hindi

कड़ियों का वर्गीकरण कैसे किया जाता है Classification of Links in Hindi के बारे में आज हम इस पोस्ट में जानने वाले है

Classification of Links in Hindi :-

जुड़ने वाले अवयवों की संख्या के आधार पर :-

  • सरल कड़ी (Simple link)
  • यौगिक कड़ी (Compound link)

सरल कड़ी में युगल (pair) बनाने वाले केवल दो अवयव जुड़े रहते हैं जबकि यौगिक कड़ी में युगल (pair) बनाने वाले दो से अधिक अवयव जुड़े होते हैं।

जोड़ की प्रकृति के आधार पर : –

(i) दृढ़ कड़ी (Rigid Link) – गति पारेषित (transmit) करते समय जिस कड़ी के आकार में बिल्कुल कोई परिवर्तन नहीं होता, वह “दृढ़ कड़ी’ कहलाती है। वास्तव में ऐसी कोई कड़ी संभव नहीं है। इसलिए उन कड़ियों को, जिनके आकार में बहुत ही कम अर्थात् नगण्य (negligible) परिवर्तन हो, दृढ़ कड़ियाँ कहते हैं। उदारहणार्थ-किसी पश्चाग्र भाप इंजन का पिस्टन, कनैक्टिग रॉड तथा बॅक आदि।

Read Now : –

(ii) लचीली कड़ी (Flexible Link) – जिन कड़ियों के आकार में गति पारेषित करते समय कुछ परिवर्तन होता है,
परंतु इस परिवर्तन से गति पारेषण में कोई अंतर नहीं पड़ता उन्हें लचीली कड़ियाँ कहते हैं जैसे स्प्रिंग तथा पट्टा (belt) आदि। ये केवल एक दिशा में ही गति पारेषित करते हैं।

(iii) तरल कड़ी (Fluid Link)-यदि किसी मशीन में गति पारेषण के लिए किसी तरल को प्रयोग किया जाता है तो प्रयुक्त तरल दाब या संपीड़न के फलस्वरूप गति पारेषित (transmit) करता है। यहाँ पर तरल एक तरल कड़ी (fluid link) कहलाता है जैसे द्रव चालित दाब मशीन (hydraulic presses), द्रविक-जैव (hydraulic jack) तथा ब्रेक (brakes) आदि। .

1 thought on “कड़ियों का वर्गीकरण -Classification of Links in Hindi”

Leave a Comment